KARNI MATA CHIRJA

(1)
तर्ज :- झुक ज्याओ जी जरा सा रघुवीर सिया म्हारी छोटी सी

मां करल्यो नैं मंजूर , अरज म्हारी छोटी सी
मैया करद्यो न मंजूर , गरज म्हारी छोटी सी

अरज म्हारी छोटी , गरज म्हारी छोटी
थे हो दानी बड़ा मसहूर , अरज म्हारी छोटी सी

कब तक मोय बिसराओगे मैया , कब हिवडै से लगाओगे मैया
म्हारी करद्यो मंशा पूर , गरज म्हारी छोटी सी
मां करल्यो नैं मंजूर , अरज म्हारी छोटी सी
सुणल्यो मात देशाणै वाला , भगतां का हर दम रखवाला
थे हो बीसहथी बलवीर , अरज म्हारी छोटी सी
मैया करद्यो न मंजूर , गरज म्हारी छोटी सी

प्रांजल शरण पड्यो सुरराया , बिड़दाली निज बिड़द निभाया
म्हारा करद्यो दुखड़ा दूर , अरज म्हारी छोटी सी
मैया करद्यो न मंजूर , गरज म्हारी छोटी सी

प्रहलाद सिह जी कविया [ प्रांजल ]
(2)

अन्नदाता म्हाने दर्शण दीजो सा , बाईसा म्हा पर परसण रिजो सा ,
निहारु राज , री वाट

1 - ज्यु किरणा बीच ,तेज सूरज को ,
यू सगत्यां बीच ,रूप अंबे इंद्र को
मात म्हाने निरखण दीजो सा
नेह रस बरसण दीजो सा
निहारु - - - - - - - - - - - - -- - - - - - ----

2 - मात अनाथ के, नाथ आप हो
सुख दुःख में ,अम्बे साथ आप हो
मात मत तरसण दीजो सा,
करुणा रस बरसण दिजो सा
निहारु - - - - - - - - - - - - - - -- - - - - - -

3 - खिली है कमोदीनी देख चंद्र को
अटल भरोसो म्हाने ,मात इन्द्र को
हिया ने हरषण दीजो सा
दूर मत म्हासे रीजो सा
निहारूं - - - - - - - - --- - - - - - - --- - ----

4 - राखी ज्यु ही म्हा पर महर राख जो
पारस ने है भरोसो, मां आपरो को
निजर भर निरखण दिजो सा
चरण रज बरसण दीजो सा
निहारूं - - - -- - - - - -- - - - - -- - - - - - -
(3)
तर्ज-महर कर मामड़जा माई...
-----------------------------------
अरज सुण हिंगलाजा आई,
मेहा घर बण कर मेहाई।।

मन ईच्छा सूं मेहो जी जाता,देवी हिंगोळ द्वार ।
दरस चाहूं नित दयानिधि,बिड़दाळी दया विचार।‌।
सुणो मां सुत री सुरराई, अर्ज सुण हिंगलाजाआई।

साद सुण्यो मां शंकरी जी,आद सगत हिंगलाज।
आस्यूं अवस ही आगणे मैं ,करण सेवगां काज।।
पात ने श्रीमुख फरमाई,अर्ज सुण हिंगलाजा आई।

दरस दिन्यो अम्बा देवल ने,सपने मांय साकार ।
इक्कीस माह रहस्युं उदर में,आय लेस्यूं अवतार।।
मोद भई देवल मनमांई,अर्ज सुण हिंगलाजा आई।

दुष्ट डकारण डोकरी मां,आंणद देवण(दैण)अनूप।
जन्म लियो मेहाघर जननी,श्री हिंगलाज सरूप ।।
चहूंदिस छाई संकळाई,अर्ज सुण हिंगलाजा आई.!

सुत श्रवण,रिछपाल शरण में,अम्ब पूरो अरदास ।
आप तणो है अम्बिका मां, बीसहथी विश्वास।।
सदां सुखसम्पत्त बगसाई..
अर्ज सुण हिंगलाजाआई,मेहा घर बणकर मेहाई।
---------------------------------------------
रिछपालसिंह बारहठ रजवाड़ी कृत

(4)
कर किरपा मां करनला,देवी मढ़ देसाण।
अबखी बेलां अम्बिका, सगती रखजै शान।।1।।

कर किरपा मां करनला, भरजे सब भंडार।
सुख सम्पत दे सांतरो,देवी लख दातार।।2।।

कर किरपा मां करनला,देसाणा धणियाप ।
वैभव दीजै भगवती,अन्न धन दे अणमाप।।3।।

कर किरपा मां करनला,कमधज ओपर खास।
आखर देकर ऊजला,उर भरजे उजियास।।4।।

कर किरपा मां करनला,अवलंब पुरो आस।
अवनी चाकर आपरौ,अजय करत अरदास।।5।।

अजयसिंह राठौड़ सिकरोड़ी कृत।।

(5)
"मेहा आँगणे रमै है रिधुराय , मैया देवळ देख-देख सुखपाय ( टेर )

घुटुरन चालत रज ने उछालत , पालणे हिंडे लुक छिप खेलत
मैया बुलावे आवै रिधु अंबा , तात बुलावै लुक जाय
मेहा आँगणे रमै है रिधुराय ।

दैवळ मैया लोरी सुणावै ,मेहो जी थपक्यां दे सुलावै
सातल सारंग नाद करे जद , मैया चुप रो सेन समझाय
मेहा आँगणे रमै है रिधुराय ।

केश संवारे बूआ तेल लगावे , शीश लगे चोट मैया उकतावे
हाथ फेर अम्बा कर कियो सीधो , रिधु रो करणी है नाम रखाय
मेहा आँगणे रमै है रिधुराय ।

नैना-नैना पगला मैया पायल बजावै , मांडणा मांडे मैया मेहन्दी लगावै
आवड़ जी रो रिधु पाट लगावै , भोळा पांख्या ने हाथां चून चुगाय
मेहा आँगणे रमै है रिधुराय ।

गायां री ग्वाळ बणे रिधुराई , बछड़ा बाल खेले है अंगणाई
दूध दूहे है रिधु नेहड़ी ने बिलोवै , मैया ब्यालु स्युं फौज जीमाय
मेहा आँगणे रमै है रिधुराय ।

ओरण हिंडा मांडे जीजीबाई , सातुं बैणा संग हिंडे महामाई
सुवाप धरा है बड़भागण घणेरी , सगत्यां संग झूला झूले सुरराय
मेहा आँगणे रमै है रिधुराय

ब्रह्मा-शारद मोद मनावै , उमा-शंकर मन्द मुस्कावै
रमा-मुकुन्द आनन्द अति पावै , रमै जोगमाया बालरूप जगमाय
मेहा आँगणे रमै है रिधुराय , मेहा देवल देख-देख सुखपाय
:- मनोज देपावत :-

(6)

तर्ज : लीले घोड़े रा असवार म्हारा मेवाडी सिरदार

ओ म्हारा अन्नदाता इन्द्रेश , थारो साफो सुरंग विशेष
म्हानैं हिवडै लगाओ सा , अन्नदाता म्हानैं मत बिसराओ सा
मारवाड़ धोरां धरती पर, पाप बढ्यो हो भारी
हिंगलाजा रो हुकुम हुयो, जल्मी इन्द्रेश कुमारी
ओ थारो च्यार कूंट जसगान, दुनिया खूब करै सम्मान
म्हानैं हिवडै लगाओ सा , अन्नदाता म्हानैं मत बिसराओ सा

गर्बिलो गेढे रो ठाकर, शगती सूं अणजाण
त्रिभुवन की महाराणी सूं बो मांग रियो प्रमाण , नभ में चील बणी महामाय नवलख भख लेवण आ ज्याय , म्हानैं हिवडै लगाओ सा
अन्नदाता म्हानैं मत बिसराओ सा

खुडद नगर मढ मस्त मदीनो, धजा ऊडै असमान
कलजुग में सतवंतो ऊंचो, अन्नदाता रो धाम
थारी हो रही जय जय कार, पूजै सकल जगत नर नार
म्हानैं हिवडै लगाओ सा , अन्नदाता म्हानैं मत बिसराओ सा

निमराणा री राजकुमारी, पगां पांगली आई जूनी
रास रमणवाली चिरताली, घूमर दी घलवाई
कोई परचां री भरमार, राखो प्रांजल पूत दुलार
म्हानैं हिवडै लगाओ सा , अन्नदाता म्हानैं मत बिसराओ सा

प्रहलाद सिंह कविया प्रांजल

(7)
तर्ज :- कागलिया मीठो मीठो बोले नी रै
कागलिया मीठो मीठो बोले नी रै , कागलिया गैरो गैरो बोलै नी रै
ओ म्हारै आसी आसी मां इन्द्रेश , अम्बे जी ओल्यूं थारी आवै जी

कागलिया चोंच तो मंढा द्यूं रै , कागलिया सोनैं री घडा द्यूं रै
थारै मोत्यां सूं जड़ा देऊं पांख , अम्बे जी ओल्यूं थारी आवै जी

कागलिया डागलै पे बैठै नी रै , कागलिया ऊंचो ऊंचो बैठै नी रै
कोई आछा आछा सूगन मनाय , अम्बे जी ओल्यूं थारी आवै जी

कागलिया खूडद मढ जाजै रै , कागलिया जूनैं मढ जाजै रै
म्हारो लेतो लेतो जा संदेश (जठै मात बसे है इन्द्रेश)
अम्बे जी ओल्यूं थारी आवै जी

कागलिया ठंडो ठंडो पाणी रै , कागलिया मीठो मीठो पाणी रै
कोई लाडां सूं चुगाऊं नौधान , अम्बे जी ओल्यूं थारी आवै जी

कागलिया मनडै रा आखर रै , कागलिया भावां रा भाखर रै
कोई करिया करिया प्रांजल पेश , अम्बे जी ओल्यूं थारी आवै जी

प्रहलाद सिह जी ( प्रांजल )

(8)
तर्ज : समदरियो लहरा लेवै सा
थारी सूरत प्यारी लागै सा, ओ म्हारी मां
थारी मूरत मनडो मोवै सा, ओ करनी मां

माथै पे मुकट सुहाणूं म्हारी मैया जी.... 2
ओ थारै गल मोतियन की माला सा
ओ म्हारी मां.... थारी सूरत प्यारी..

भाल सिंदूर सुरंगो है टीको.... 2
थारो मुखडो चांद सरीखो सा
ओ म्हारी मां..... थारी सूरत...

कंचन चूड़ फबै जी भुजलंबा... 2
थारी लाखी लोवड निराली सा
ओ म्हारी मा.... थारी सूरत प्यारी...

कानां में कूंडल नाक में मोती.... 2
थारै पगल्यां पायल बजणती सा
ओ म्हारी मा... थारी सूरत प्यारी....

सिंह चढी आवो सुरराया..... 2
ओ म्हारै आंगण आज पधारो सा
(ओ थानैं प्रांजल न्यूंत बुलावै सा)
ओ म्हारी मां...थारी सूरत...

(9)
तर्ज....मेहाजी री लाडली करणी माता नाम
टेर... सागर धापु लाडली ,इन्दर बाईसा नाम
खुड़द धरा पर अवतरया,मोटो थरप्यो थान ।।
थांरी महिमा अपरम्पार,
धोक देवण ने देवरे ,आवे नर और नार
बाईसा आवड़ रा अवतार,
शरणे आयो मावड़ी, करदो भव से पार ।।

कल्प तरु ज्यूं खेजड़ो,माँ करणी दरबार
प्रथम नमन माँ मैहाई ने,आप घणा दातार ।।
थांरी महिमा.........
रतनूं कुल में अवतरया,आप हरण भू भार
अन्नदाता रे (श्री)चरणां में,वन्दन बारम्बार ।।
थांरी महिमा.........
भक्त उबारया असुर संहारया,आप ही सिरजनहार
शक्ति रुप त्रिशूल हाथ में, होय सिंघ असवार ।।
थांरी महिमा..........
"श्याम मुन्धड़ो" अरज करे,हैलो सूण करतार
माँ हिंगलाजा,आवड़,करणी,इन्द्र कंवर सरकार ।।
थांरी महिमा..........

श्याम मुन्धड़ा, दुलचासर, कलकत्ता

(10)
तर्ज :- मेवाड़ी राणा सुणता ही जाज्यो सा

म्हारा किनियानी करतार , थारी महिमा अपरंपार
मैया विनती (अरजी) सुणज्यो सा , डाढ्याली म्हानैं दर्शन दीज्यो सा

करणी थारै प्रताप सैं, बीको राजा बण ज्याय
संवली हो मुल्तान जेल सूं शेखो ल्याय छुडाय
ओ पल में व्योम दियो मां नाप, थारो तीन लोक धणियाप
मैया दर्शन दीज्यो सा , डाढ्याली म्हारी अरजी सुणज्यो जी

गंग भूप रै चढ्या फिरंगी भूप रियो घबराय
सिंघ रूप धर पूगी सगती, काल बणी गरणाय
दीन्या बम गोला बरसाय, गौरा भाग्या जान बचाय
मैया अरजी सुणज्यो जी , मेहाई म्हानैं दर्शन दीज्यो जी

नियती को लेखो किस्मत में कई कई खेल रचाय
जिणरो अंत जठै लिखियोडो, बठै खींच ले आय
कान्हो करनल सै अडज्याय, माजी किरचा दिया खिंडाय,
मैया अरजी सुणज्यो जी , किनियाणी म्हानैं दर्शन दीज्यो जी

सेवग रै हरदम हाजिर मां ममताली दुलराय
बिरदाली डाढ्याली मायड आधै हेलै आय
प्रांजल देवराज नित ध्याय, मैया हिवडै लेवो लगाय
ओ मैया दर्शन दीज्यो सा , डाढ्याली म्हारी अरजी सुणज्यो सा

रचना :- प्रहलाद कविया ( प्रांजल )

(11)
म्हारो मन नहीं लागे सा, ओळ्यू आवे छै करनल मात् री
म्हारो दिल नहीं लागे सा,ओळ्यु आवे छे करनल मात री

1 - खड़ी निहारु राह मैहाई , बीत रया दिन रैण -2
एक-एक दिन म्हाने साल सम लागे,बरसण लाग्या नैण
अम्बे कहां देर लगाई सा,औळ्यु आवे छै करनल मात री
म्हारो - - - -- - - - - - - - - --- - - - - --- -

2 - जनम- जनम रा आप हो मायड़,मां सो नहीं कोई और
नेह लगाकर छोड़ मत दीजो ,आप हाथ म्हारी डोर
प्रीत की रीत नहीं जाणु सा, ओळ्यु आवे छे करनल मात री
म्हारो - - - - - -- - - - -- - - - -- - - - ----

3 - अगला जनम में मां,पंछी करजो रहुं ओरण में आय
उण धरती पर शीश धरू, जठे आप चराता गाय
अम्बे अब और कहां जाऊं सा, ओळ्यु आवे छै करनल मात री
म्हारो - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - -

4 - सब तीरथ रो सार देसाणो , लागे ज्यु चारों धाम
पारस ने आशीषा दीजो , थांसु ही सरसी काम
अम्बे जी म्हासे दूर मत रिजो सा ,ओळ्यु आवे छे करनल माता री
म्हारो - - - - - - - - - - - -- - - - - - -- -
(12)

तर्ज :- करो नित याद करणी न मिटासी सोच मेहाई

करुणा सुण करनला माई , शरण तेरी मां सुखदाई..
शरण तेरी मां सुखदाई -2 , करुणा सुण...
मनोहर मात री मूरत.. सुन्दर घणी पावन सरसाई।
दरस सूं दुःख हुवै दूरां, साजत सुख सातां सुरराई ।।
करुणा सुण करनला माई .......

उद्धार्या अधम जग माही , करनला आई करुणाई
सकल हित कारज सारे माँ , विडारे विपद वरदाई
करुणा सुण करनला माई ...

चाहना ठौर चरणा री , शगत राखो माँ शरणाई
नवल नित ललिता नियराई , तरसना दरस तुझ तांई
करुणा सुण करनला माई ....

वत्सला भगत भव भारी , करनला और न दूजो कोई
सुर नर मुनि जन सब सिंवरे , सातूं सगत्यां संग सुरराई

करुणा सुण करनला माई , शरण तेरी माँ सुखदाई
(13)
तर्ज-आशा ले के आयो अम्बा देवी..

अरज सुणो म्हारी अम्बा,मात मेहाई ,किरपा करो किनियाणी,सुत शरणाई ( टेर )

ऊठतां प्रभात अम्बा ,गुण तेरा गाऊं।
फैरूं सुमरण कर पग,धरणी धराऊं।।
बीस भुजाळी अम्बा मत बिसराई..(1)
किरपा करो किनियाणी सुत शरणाई..

जन्म-दायनी जोगण ,तूं भव तारणी!
नेहचो कर मम रोग निवारो,सब काज सारणी ।।
कान करो मां करनल,मम करुणाई ..(2)
किरपा करो किनियाणी सुत शरणाई..

स्वार्थी संसार सारो,झुठो घणो जाळी ।
मतलब री मिजमानी,करे करणी काळी ।।
आप बिना कुण अम्बा, सुत रे सहाई... (3)
किरपा करो किनियाणी सुत शरणाई..

अटल आधार अम्बा,एक तेरो आसरो।
देवी सुख सम्पत दिज्यो,दुख हरो दास रो।।
सुत रे रहो सुरराया,संग में सदांई..(4)
किरपा करो किनियाणी सुत शरणाई...

सुत "रिछपाल" शरणे,आयो अम्बा ईसरी।
सदां ही राखी सेवग री,पत प्रमेसरी।।
दया दिल धार दिज्यो ,भगती भलाई..(5)
किरपा करो किनियाणी सुत शरणाई..
अरज सुणो म्हारी अम्बा,मात मेहाई...
रिछपाल सिंह बारहठ रजवाड़ी कृत
(14)

तर्ज , कान्हा कान्हा आन पड़ी मैं तेरे द्वार......
---------------------------------------
टेर. हु...हुं.........हुंहुं.......
मैया-मेरी करणी बड़ी है दातार.2
मोहे काबो समझ निहार..... मैया-मेरी करणी बड़ी है दातार..

1,लोवड़ी वाली छाँव थै राखो , भगत री मर्जी आप ही आखो
द्वार पे थांरे में आय गयो हूं.. , अम्बे....................
मोहे दास समझ कर पार..... , मैया मैरी करणी बड़ी है दातार..2

2,भव बिच तरणी जीवन म्हारो.. , मँढ़ दैशाणो अम्बे एक सहारो..
झगड़ु री तरणी पल में तारी.. , अम्बे...................
मोहे झगड़ु समझ कर पार..... , मैया मेरी करणी बड़ी है दातार.2

3,ममता रूपी करनल मात मेहाई , जग विच महिमा थाँरी अद्भुत छाई
शेख री मैया पल में करदी सहाई. , अम्बे....................
मोहे शेख समझ कर पार.... , मैया मेरी करणी बड़ी है दातार 2

4,लाखीणो है देश मां थाँरो.. , औरण विच मन रमीयो म्हारो.
कर जौड़्यां रतनु हणमत ध्यावे , अम्बे...................
मोह ग्वाल समझ कर पार , मैया मेरी करणी बड़ी है दातार 2
मोहे काबोसमझ निहार..... , मैया मेरी करणी बड़ी है दातार 2

*हनुमान सिंह रत्नु**
(15)
तर्ज, एक राधा एक मीरा अंतर क्या दोनों की चाह में बोलो..

एक करणी.... ,एक इंद्र......, दोनों है आवड़ रूपाँ.....
अंतर क्या दोनों की शक्ति में बोलो2, एक मात मेंहाई, एक इंद्र बाई 2

1,करनल ने आवड़ को पूजा, मां इन्द्र ने करणी को ध्याया...।
दोनों सगत अवतार धरा पर, हे हिंगलाज री माया...।।
एक धापू ,एक सागर... एक देवल,एक मेहघर....
अंतर क्या दोनों की साख में बोलो..2
एक किनीयां री बाई, एक रत्नु री जाई...2
एक मात मेहाई, एक इंद्र बाई..

2, करनल ने झगड़ु को तारा, मां इंद्र ने साहू उबारा ।
देसाणे में मात करनळां, खुड़द में इंद्र सहारा ।।
एक ममता, एक भक्ति.. एक क्षमता, एक शक्ति..
अंतर क्या दोनों के ,कोप मे बोलो...2
एक कान खफाई, एक गुमान खपाई...2
एक मात मेहाई, एक इंद्र बाई..

3, देशाणे में मात करनळां, खुड़द में श्री मंढ़ राजा।
हणमत पुकार करे दोनों से, होवे सबका काजा ।।
एक तुरतं, एक अविलबं , एक अम्बें, एक भुजलबं
अंतर क्या दोनों की साय में बोलो....2
एक अविलंब आई, एक तुरतं सहाई....2
एक मात मेहाई, एक इंद्र बाई 2
रचना✒हनुमान सिंह रत्नु
(15)
राखो मोहे शरण डाढाळ चंडी चिरताली, अम्बा सुमिरूँ बारम्बार बीस भुज वाली

जद सुमरि शेख मुल्तान से आप सिधाया
धर संवळी रूप डाढाळ चंवरी पर ल्याया
जद कीनी आर्त पुकार शाह समंदर से
पल दीनी नैया तार दुहन्ता कर से गया
राजी हो रिड़मल ने राज दियो प्रतिपाली
अम्बा सुमिरूँ बारम्बार बीस भुज वाली

जड़ टूटी लाव अणदु ने कूक लगाई
धार दुम्बी रूप धजबंद पधारया माई
गया लील कोलायत लाखण डूब्यो जळ में
सगति गया यम रे लोक ले आया पळ में
राख्या काबा बणाकर पूत मात मतवाली
अम्बा सुमिरूँ बारम्बार बीस भुज वाली

कियो कान्हे पर जद कोप मात मेहाई
धरणी पर खींची लीक मौत दर्शाई
कीनी बन्ने भगत पर कृपा सगत सुरराई
नैणा बिन मोवणी मूरत मात घड़वाई
हिरदे री आर्त पुकार जाए ना खाली
अम्बा सुमिरूँ बारम्बार बीस भुज वाली

रग रग में बढ़ रयो पाप दर्श दिखलाओ
कलजुग में पुकारूँ मात धरा पर आओ
करुणामय करणी आप करुणा बरसाओ
डगमग नैया मझधार पार उतराओ
मैया राखो 'मनुज' पर आप सदा रखवाली
अम्बा सुमिरूँ बारम्बार बीस भुज वाली

राखो मोहे शरण डाढाळ चंडी चिरताली, अम्बा सुमिरूँ बारम्बार बीस भुज वाली
मनोज देपावत
(16)
तर्ज- जानकीनाथ सहाय करे तब..
-----------------------------------------
रिधूराय सहाय करे तब.. , कौन बिगाड़ करे नर तेरो...
मात मेहाई करत सहाई.. , अटल भरोसो राख अम्बे रो..
रिधूराय सहाय करे तब....( टेर )

उमा रमा ब्रह्माणी सुराणी , रमा रूद्राणी बहु रूप है तेरो..
आवड़ बिरवड़ आशापुरी मां , डाढ्याळी नवखण्ड में डेरो....
रिधूराय सहाय करे तब....(1)

धरम डिग्गै धरणी पर जब जब , घटे जप तप जाप घणेरो...
दुष्ट संघारण दास उबारण , देवी नव तब दैह धरे रो...(2)
रिधूराय सहाय करे तब...

व्याधि विकार विषाद हरे मां , सुखद संतोष को करत सवेरो..
दसूं दशा ग्रह दोष दळण कर , फंद द्वंद को मेटत फेरो...(3)
रिधूराय सहाय करे तब..
करणी करुणा कान करिज्यो , बीसहथी अब दया बिचारो ।
सुख सम्पत्ति समृद्धि दे सगती , नैहचो कर सब रोग निवारो।।(4)
रिधूराय सहाय करे तब...

डगमग तरणी करणी डोले , सगत नहीं अब और सहारो ।
बांह पकड़ रिछपाल बारठ री , अम्बा भवजळ पार ऊतारो।।(5)
रिधूराय सहाय करे तब ... , कौन बिगाड़ करे नर तेरो....
---------------------------------------------
रिछपालसिंह बारहठ रजवाड़ी कृत ( चारणवासी - चूरू )

(17) तर्ज -दुबारे छक आज्यो जी डाढाल
____________________________
अम्बा म्हारे हरख पधारो हिंगलाज।
करणे सेवग रा सुरराया सिद्ध काज।।(टेर)

सती तूंही सिरमोर सब में,सगत्यां में सिरताज।
आद अन्नादि ईश्वरी मां,भव रा सब दुख: भांज।।
करणे सेवग रा सुरराया सिद्ध काज..(1)

आज्यो अवस ही अम्बिका, दुष्टन् करण दुराज ।
खळ दळजै भरजै खप्पर,गिरजा बण पड़ गाज।।
करणे सेवग रा सुरराया सिद्ध काज..(2)

डग भर आज्यो डोकरी,अम्बा सुणन्त आवाज।
भवजळ त्यारो भगवती,गवरी गरीब निवाज !!
करणे सेवग रा सुरराया सिद्ध काज..(3)

चार कूंट चवदै भवन में,रम्भा तिहारो है राज ।
तीन लोक नवखण्ड री, मोटी तूंही महाराज ।।
करणे सेवग रा सुरराया सिद्ध काज..(4)

हाण दोख विपदा हरो मां,सुख सम्पत घर साज।
रोहड़िये रिछपाल रो मां,हेलो सुणो हिंगलाज।।
करणे सेवग रा सुरराया सिद्ध काज..(5)
रिछपालसिंह बारहठ रजवाड़ी कृत

(18)तर्ज- तालरिया मगरिया
----------------------------------------
ओरण री बोरङिया रे मीठा लागे बोरिया ।
आई रे दैशाणे वाली भोम प्यारी मन भाणी रे ।।
प्यारी मन भाणी ओ लागे है सुहाणी जी ।
आई रे दैशाणे वाली भोम प्यारी मन भाणी रे ।।टेर।।

कठे तो सुहावे ओ मीठी मरूधर बोरङी ।
कठे गूंजे काबा री किलकार प्यारी मन भाणी रे ।।
ओरण मे सुहावे ओ मीठी मरूधर बोरङी ।
मढ मे गूंजे काबा री किलकार प्यारी मन भाणी रे ।।

कठे तो बिराजे ओ करणी मोटी मावङी ।
कठे बिराजे इन्द्र मात कृपालु मन भाणी रे ।।
देशाणे बिराजे ओ करणी मोटी मावङी ।
मढ खूङद इन्द्र मात कृपालु मन भाणी रे ।।

कुण जी चिणायो जी मैया थारो देवरो ।
कुण जी लगाई गढ री नीव प्यारी मन भाणी रे ।।
भक्तां चिणायो ओ मैया थारो देवरो ।
करणी माँ लगाई गढ री नीव प्यारी मन भाणी रे ।।

कुण जी रचावे ओ प्यारी चिरजा मात री ।
कुण जी बसावे घट माय मात जग तारणी रे ।।
सांवल रचावे ओ प्यारी चिरजा मात री ।
भक्त बसावे घट माय मात जग तारणी रे ।।

ओरण री बोरङिया रे मीठा लागे बोरिया……..।।
रचियता- पप्पू दान (सांवल दान)

(19)

राजल मां म्हारी आप बिना कोन सुणी
काछैला म्हारी आप बिना कोन सुणी

1-आप सो दैव दयालु नहीं जग में ममता मूरत बणी
सजीयो मां दरबार अनोखो भगतन भीड़ घणी
राजल मां- - - - - - - - - - - - - - - - - - -

2- मनडा री बाता अम्बे कुण ने सुणाऊ , आप बिना कौन सुणी
लियो आसरो आप रो अम्बे लागी लगन घणी
राजल मां- - - - - - - - - - - - - - - - - - -

3- पीथल री फरियाद सुणी जद आया मां बाघ बणी
लाज बचाई मां आण रखाई आप रजपूत तणी
राजल मां- - - - - - - - - - - - - - - - - - -

4- पकड़ कंठ नव खण्ड सिधाया मां दुर्गा रूप बणी
गाय गाय कह प्राण बचाया मां थासु है गरज घणी
राजल मां - - - - - - - - - - - - - - - - - -

5 दर्शन कर मां जीव सुख पावे, आवे याद घणी
पारस कहे मां मात तात ओर आप ही भ्रात बणी
राजल मां - - - - - - - - - - - - -- - - - - -
(20)
तर्ज -कुरजा

कर जोड़या करूं बिनती माँ, सुणज्यो थे ध्यान लगाय,
अम्बे माँ म्हारे मनडे़ री आश पूराय..

जग रा झमेला दुख देवणा माँ, दैह ना धीर धराय..(1)
अम्बे माँ....

आप तणी है अम्बा आरजू माँ,पूरिज्योै मन हरषाय.. (2)
अम्बे..

भरम भेद सूं दुनियां ढकी माँ, तुझ सूं छूप्यो नहीं कांय.. (3)
अम्बे...

जगडो़ झूठो है अम्बा जोगणी, स्वार्थ साधे सवाय...(4)
अम्बे...

ममता पाळो नी म्हारी मावडी़, साद सुणन्ता आय..(5)

बोल न जाणु मन री बातडी़ माँ, किण विध देऊ समझाय...(6)
अम्बे...

ललिता अम्बा थांरी लाडली जी, दिज्यो माँ दरस दिखाय.. (7)
अम्बे..
(20) ओ म्हानै क़ाबलियो बनाले , थारै चरणां मांय रमाले।
हो मात सरणों में थारै म्हानै राखिज्यो।–2

हो मैया दरस तेरा ही नित पाऊँला पाऊँला।–२
तेरे चरणों शीश नवाऊँला नवाऊँला।–2
थारै चरणां सूं दूर माजी कियाँ रवूलां जी माजी कियाँ रवूलां जी।
ओ म्हानै क़ाबलियो बनाले , थारै चरणां मांय रमाले।
हो मात सरणों में थारै म्हानै राखिज्यो।–2

हो मैया लाडू तो पेड़ा रोज खावूंला, खावूंला।–2
साथै छप्पन भोग लगावूंला लगावूंला।–२
थारै चरणां में भूखों माजी नहीं रवूंला जी।
माजी नहीं रवूंला जी।

ओ म्हानै क़ाबलियो बनाले।
थारै चरणां मांय रमाले।
हो मात सरणों में थारै म्हानै राखिज्यो।–2

थारै चरणां मांय लोट पटोला खावूंला जी खावूंला जी।–२
माजी मढ़ मांय किलोळ मचावूंला जी मचावूंला जी।–2
हो थारै निजरां सूं दूर माजी नहीं जावूंला जी मैया नहीं जावूंला जी।
ओ म्हानै क़ाबलियो बनाले , थारै चरणां मांय रमाले।
हो मात सरणों में थारै म्हानै राखिज्यो।–2

थारौ सेवग अजयसिंह महिमा गावै है।–2
थारै चरणों में चिरजा चढ़ावे है।–2
थारी भगती सूं दूर मैया नहीं रवूंला जी मैया रवूंला जी।
ओ म्हानै क़ाबलियो बनाले , थारै चरणां मांय रमाले।
हो मात सरणों में थारै म्हानै राखिज्यो।–2
अजयसिंह राठौड़ सिकरोड़ी

(21) म्हारो मन नहीं लागे सा, ओळ्यू आवे छै करनल मात् री
म्हारो दिल नहीं लागे सा,ओळ्यु आवे छे करनल मात री

1 - खड़ी निहारु राह मैहाई , बीत रया दिन रैण -2
एक-एक दिन म्हाने साल सम लागे,बरसण लाग्या नैण
अम्बे कहां देर लगाई सा,औळ्यु आवे छै करनल मात री
म्हारो - - - -- - - - - - - - - --- - - - - --- -

2 - जनम- जनम रा आप हो मायड़,मां सो नहीं कोई और
नेह लगाकर छोड़ मत दीजो ,आप हाथ म्हारी डोर
प्रीत की रीत नहीं जाणु सा, ओळ्यु आवे छे करनल मात री
म्हारो - - - - - -- - - - -- - - - -- - - - ----

3 - अगला जनम में मां,पंछी करजो रहुं ओरण में आय
उण धरती पर शीश धरू, जठे आप चराता गाय
अम्बे अब और कहां जाऊं सा, ओळ्यु आवे छै करनल मात री
म्हारो - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - -

4 - सब तीरथ रो सार देसाणो , लागे ज्यु चारों धाम
पारस ने आशीषा दीजो , थांसु ही सरसी काम
अम्बे जी म्हासे दूर मत रिजो सा ,ओळ्यु आवे छे करनल माता री
म्हारो - - - - - - - - - - - -- - - - - - -- -

(22) *महर कर मो पे मावड़ली।*
*चरण शरण बख्शो हे शक्ति, पूजूं पावड़ली।।टेर।।*

*1. जरा जोर की मात मिटाई, जरा न आयो जोर।*
*ज्यूं जगदंब जोड़ दी म्हारी टूटी जीवन डोर।।*
*जियां अणदा की लावड़ली।।1।।.....*

*2.सुख-सुविधा मां मैं नहिं मांगूं, द्यो भक्ती वरदान।*
*गाऊं मैं गुण-गान रात-दिन, कीरत करुं बखान।।*
*मिले नित रोटी-राबड़ली।।2।।.........*

*3.सपनां में भी दर्शन पाऊं, देशनोक रा राय।*
*चिरजा गाऊं और चराऊं, ओरण में हे माय।।*
*सदा मैं थारी गावड़ली।।3।।.......*

*4.प्रबल पवन को वेग भयंकर, भंवर पड़े भव मांहीं।*
*अरज़ "उमेश" उचारत अंबा, आन सहारो नाहीं।।*
*मैया तारो नावड़ली।।4।।.......*
(23) अति आनन्द तात रे आंगण, मात रमे नित मेहाई

झगुलो लालर श्याम झडूलो, श्याम रंग तन सरसाई
हंसता लाल जीभ रे हेठे, दांत श्वेत दो दरसाई
अति आनन्द तात रे आंगण, मात रमे नित मेहाई

हाथा कड़ा गुडाले हाले, ठाला गल में ठणकाई
थिड़ी करन्ता चाले थम थम, रमझम घुघर रमकाई
अति आनन्द तात रे आंगण, मात रमे नित मेहाई

मात परात ठकावे महीडो, आडी लपा ले लबकाई
मुख पर दाड़ी मूंछ म्हीरा, झुगले रींगा झरकाई
अति आनन्द तात रे आंगण, मात रमे नित मेहाई

एक कर माटो झाल उभ ज्यावे, आपै लोटा ऊँधाई
कीच मचाकर लुक ज्यावे ओले, बोले मात आईआई
अति आनन्द तात रे आंगण, मात रमे नित मेहाई

रमै रिधू इम तात आंगणे, मोद मात र मन मांई
सोहनदान चरण रे शरणे, गूढ़ बाल लिला गाई
अति आनन्द तात रे आंगण, मात रमे नित मेहाई
(24) राग - बार बार करू विनती
हिंडो तो मांडयो हरिये बाग मे जी म्हारी करणी माँ ,ओ म्हारी जगदम्बे माय
हिण्डण र मिस आय करणी माँ ,झूलण र मिस आय करणी माँ

रंग कसूम्बी रेशम डोर जी म्हारी करणी माय ,म्हारी जगदम्बे माँ ,
सोनेरी गोटा सूं सजाय करणी माँ ,लुम्बा री लड़ लगवाय करणी माँ

चोखी चंदन चौकी चिकणी जी म्हारी करणी माय,म्हारी जगदम्बे माँ
चांदी रा घुंघर च्यारूं खूंट करणी माँ ,ज्यारी मीठी बाजे झिणकार करणी माँ

बैठण बिछाउँ मखमल बैसणो जी म्हारी करणी माय ,म्हारी जगदम्बे माय
रज रज हिंडो राज करणी माय ,भुजलम्ब पींग भरो करणी माय

अनुपम लीला ओपणी जी म्हारी करणी माय ,म्हारी जगदम्बे माय
झूला तो भांवा रा झुलाऊ करणी माय ,पाऊं परम् सुख सात करणी माँ

धरे नित ललिता ध्यावना जी म्हारी करणी माय म्हारी जगदम्बे माय
किरपा करो किनियांण करणी माँ ,ध्याऊँ थान धिनियाण करणी माँ

(24)
जगद्मबा रो सिणगार अनुठो , निरखै मनड़ो म्हारो रे ।
भूल गयी रे मैं तो कारज सगळा , ऐसो जादू डारयो रे।

1 अजब रंगी रँगरेज चुंदड़ी , रखड़ी रतन जडायो रे।
कान कुण्डल गल माल सुशोभित , नैनन कजलो सारयो रे।
जगद्मबा रो सिणगार अनुठो , निरखै मनड़ो म्हारो रे ।

2 अंगिया धाबळ कर मैं कंगन , पग पैंजणीया पैरया रे।
छवि अद्भुत अम्बा रूप मनोहर , पुलक पुलक मन हरख्या रे।
जगद्मबा रो सिणगार अनुठो , निरखै मनड़ो म्हारो रे ।

3 इण छब न मन माही समाऊं , ललिता तोरे बलिहारी रे।
निज चरणन मैं ठोर तू दीजे , मायड़ मेहदुलारी रे।
जगद्मबा रो सिणगार अनुठो , निरखै मनड़ो म्हारो रे।
(25) तर्ज:- कानूङा लाल घङलो म्हारो भरदे रे
---------------------------------------
मेहाई मात मनङो म्हारो सरसे रे ।
दर्शन कर हिंयो हरसे रे ।।टेर।।
•••••
वैद बखाणे मैया विमल जश गावे ।
देव अम्बर मांही निरखे रे ।।
मेहाई मात मनङो म्हारो सरसे रे ।

ॠषि मुनी ध्यावे मैया, देव गुण गावे ।
नभ मे सुमन नित बरसे रे ।।
मेहाई मात मनङो म्हारो सरसे रे ।

ध्यान करावो मैया दरश दिखावो ।
दर्शन को मन तरसे रे ।।
मेहाई मात मनङो म्हारो सरसे रे ।

थारा टाबरिया मैया, राह निहारे ।
नीर नयन सूं बरसे रे ।।
मेहाई मात मनङो म्हारो सरसे रे ।

सांवल गावे मैया, दर्शन पावे ।
हिवङो हरख सूं हरषे रे ।।
मेहाई मात मनङो म्हारो सरसे रे ।
सांवल दान देपावत (पप्पू दान)
सोरठा :- भूमि ऊतारण भार, सारण कारज सेवगा !
लेकर नवलख लार, आवड़ आइ अवनी पर !!

भय हरणी भुजलम्ब, अशरण शरणी अम्बिका!
जयति मात जगदम्ब, साय रही सागर सुता!!
(26)
**चिरजा**(राग- माड,तर्ज-दुबारे छक आज्यो जी डाढ्याळ)

टेर- अम्बे थानै घणी खम्मा खुड़द नरेश , आवड़ रूपा जग जननी इन्द्रेश..

1-नगर नामी नागौर में मां, खुड़द ग्राम विशेष।
आवड़ पधारया ईशरी मां, काटण कष्ट कळेश!!
आवड़ रूपा जग जननी इन्द्रेश..

2- बड़भागी खुड़दा धरां, मात रमै इन्देश।
नारद मुनि करत स्तुति, बरसावै पुष्प महेश ।।
आवड़ रूपा जग जननी इन्द्रेश..

3- मूरत डोरो मुन्दडी़ मां, कनक कडा़ विशेष।
सौहे साफो केशरियां मां, सुन्दर मर्दाना भेष।।
आवड़ रूपा जग जननी इन्द्रेश..

4-सेवगां सुध लेवो संदा मां, ना कर बेल ऊवेश।
दुष्ट खपावण डोकरी मां, आज्यौ थळवट देश।
आवड़ रूपा जग जननी इन्द्रेश..

5- सुख सम्पत्ति भक्ति मैं चाहूँ, बगसो मात हमेश ।
बारहठ रिछपाल चरण रो चाकर, करी मां 'अर्जी' पेश..
थाने घणी खम्मा खुड़द नरेश .... आवड़ रूपा जग जननी इन्द्रेश..
रिछपाल सिंह बारहठ कृत
(27)

श्री आवड़ साकार.. आया बण इँदर... श्री आवड़ साकार... (टेर)

चार छवे नव एक की संवत, साढ शुक्ल पख नौमी सांप्रत,
शुभम् शुक्रवार.. ओ माँ -2 , आई अवनि पर..
आवड़ ले अवतार...(1)

आया बण इँदर..श्री आवड़ साकार.. , धापू मात श्री देवल रूपां
सगती इन्द्र जन्मी स्वरूपा, सिंधुसुता सरकार... ओ माँ -2
खुड़द गढ़ खेले... , मरूधर बीच मंझार.. (2)
आया बण इँदर ..श्री आवड़ साकार..

ऊमर चार बरस जब आई, पर्चो पहलो दियो प्रभुताई ,
भेष मर्दाना धार..ओ माँ-2 , किन्या परवाडा़..
सगती सृजनहार (3)
आया बण इँदर श्री आवड़ साकार..

धोती कुरतो धवलो धारण, कांना लूंग कनक हिये हारन्,
सजिया सिंघ सवार..ओ माँ-2
मचक मौचड़ियाँ... , सगती तणो सिणगार..(4)
आया बण इँदर.. श्री आवड़ साकार..

बारठ रिछपाल किरत तव बरणे, सगती आयो माँ सेवग शरणे,
दया तो करो दातार.. ओ माँ
बगसो सुख भगती, इन्द्र तणो आधार..(5)
आया बण इँदर श्री आवड़ साकार..
------------------------------------------
रिछपाल सिंह बारहठ रजवाडी़ कृत
( 27 ) तर्ज , ले तो आये हमको सपनों के गावं में.....

हम तो आये है करनल ,देशाणे गांव में...2
लोवड़ी छाँव में बिठाये रखना.... करणी मां ....करणी मां....2 ( टेर )

1, सुरगां से प्यारो अम्बे थांरो देशाणो..।
कलजुग माहीं मेहाई है, इक ठिकाणो..।।
थांरे सिवा दुजो ना कोई जग मे मैया..2
भगतां रा रैला चाले देशाणे गांव मेंं...
हम तो आये करनल देशाणे गाव में ..
लोवड़ी छांव में बिठाये रखना .. करणी मां ......करणी मां.....2

2,, किरत तिहारी अम्बे है भव से भारी..।
मुरत डाढा़ंली अम्बे है सबसे न्यारी...।।
भक्ती में तेरे आके खड़े है देव सभी..2
मिलगी है ठोर म्हाने काबां रे गावं में..
हम तो आये है करनल देशाणे गांव में..
लोवड़ी छांव में बिठाये रखना.. करणी मां.....करणी मां.....2

3,,नैणा में म्हारे कोई दुजो ना आवे.।
हरपल रसना म्हारी रिध्दु रिध्दु गावे.।।
ममता री छांव हणमत पे मां आप रखो 2
मिलज्यावे ठोर थोड़ी थाराँ ही पावं में.
हम तो आये करनल देशाणे गांव में ...
लोवड़ी छांव में बिठाये रखना... करणी मां....करणी मां ....2

*हनुमान सिहं रतनु*
तर्ज:- मने लाद्यो नी बाजूदार बंगङी

मने देवोनी माँ दीदार करणी, दीदार करणी म्हारी मात करणी ।
मने देवोनी माँ दीदार करणी, दीदार करणी म्हारी मात करणी ।।

सोऊं तो पाऊं दर्शन जागूं तो पाऊं ।
हिरदे बिराजो म्हारी मात करणी।।
हो हिरदे बिराजो म्हारी मात करणी ।
मने देवोनी माँ दीदार करणी ।।

आवङ आवो म्हारे करनल आवो ।
नवलख आवो लोवङ्याल करणी ।।
हो नवलख आवो लोवङ्याल करणी ।
मने देवोनी माँ दीदार करणी ।।

आंधा ने आंख्या देवो पंगु ने पगल्या ।
सिंघ चढोनी असवार करणी ।।
हो सिंघ चढो नी असवार करणी ।
मने देवोनी माँ दीदार करणी ।।

काळा भी आवे म्हारे गोरा भी आवे ।
अर्ज सुणो माँ हिंगलाज करणी ।।
हो अर्ज सुणो माँ हिंगलाज करणी ।
मने देवोनी माँ दीदार करणी ।।

सांवल गावे थारा दर्शन पावे ।
जन्म सुधारो म्हारी मात करणी ।।
हो जन्म सुधारो म्हारी मात करणी ।
मने देवोनी माँ दीदार करणी ।।

तर्ज - छोटी सी उम्र परणाई ओ बाबासा

घणा दिन होया अम्बे देशांण बुलाज्यो दर्शन दीज्यो माँ, दर्शन दीज्यो माँ

1. पाणी बिच ज्यूँ मीन पियासी
इण जग में मैं माय
दर्शन करूं जद मैं सुख पाऊं
सूरत थारी दरशाय

2. भाग बड़ा मैया चवदस मङ्गला
जोत दरश दिखलाय
पग पग ध्याऊँ अम्बे मग मग हेरुं
सिंवरु सदा थान माय

3 थांसु भवानी म्हारो नेह घणेरो
नेह घणो महामाय
रात दिवस ललिता करे है विनती
देशांण बुलवाय

4 साँची संकळाई थारी मात भवानी
नमन करूँ सुरराय
महिमा तिहारी अम्बा जो मैं बखाणु
वर्णन कियो ही न जाये

घणा दिन होया अम्बे देशाण बुलाज्यो
दर्शन दीज्यो

तर्ज : तेरी दुनिया से दूर

मेरी नाव पडी मझधार, लहरें डसने को तैयार , मैया पार करना
ओ मैया मेहाई दातार तेरे हाथ मेरी पतवार , मैया पार करना

जाऊं जहां भी जगदम्ब तू रहना मेरे संग संग
मैया मत भूलना

छोडोगे अकेला तो दुनिया ये जालिम सतायेगी मुझे
जख्मों को मेरे ये रोज कुरेदे रूलायेगी मुझे
मुझे तेरा आधार, अंबा आज उतारो भार
मैया पार करना
मेरी नाव..
....

आज्या काबावाली पुकारे तेरा बेटा बलायें हर ले
बेटा जो बुलाता तो मैया दौड़ी आती पुकारे सुनके
देवी डाढ्याली दातार म्हारी किनियाणी करतार
मैया पार करना

मेरी नाव पडी....
म्हारे सिर पर है करणी माँ रो हात्त , कोई तो म्हारो कांई करसी ।।टेर।।

रहूं देशाणे देश मे या रहूं कहीं विदेश ।
पल मे पधारे म्हारी मात भवानी, भक्तां रो काटण कलेश ।।
कोई तो म्हारो कांई करसी

आभे चमके बीजली माँ जद बरसण री आस ।
करणी माँ कृपा करे तो दुष्टां रो करे है विनास ।।
कोई तो म्हारो कांई करसी

देशाणे री पावन धरा पर, करणी माँ रो धाम ।
दुनिया आवे दर्शन पावे, बिगङ्या सुधारे सारा काम ।।
कोई तो म्हारो कांई करसी

जीमण भूंजी लापसी माँ, पीवण निर्मल नीर ।
सातूं बहना संग पधारे, काळो गौरो है अगवाण ।।
कोई तो म्हारो कांई करसी

लाज रखे ममतामयी माता, हाजिर रहत हमेश ।
सांवल दान शरण मे आयो, बगसो माँ कृपा विशेष ।।
कोई तो म्हारो कांई करसी

म्हारे सिर पर है, करणी माँ रो हात्त , कोई तो म्हारो कांई करसी ।।
रचियता:- सांवल दान देपावत
तर्ज , कान्हा कान्हा आन पड़ी मैं तेरे द्वार......

टेर,हु...हुं.........हुंहुं.......मैया-मेरी करणी बड़ी है दातार.2
मोहे काबो समझ निहार.....मैया-मेरी करणी बड़ी है दातार..

1,लोवड़ी वाली छाँव थै राखो , भगत री मर्जी आप ही आखो
द्वार पे थांरे में आय गयो हूं..अम्बे....................
मोहे दास समझ कर पार.....मैया मैरी करणी बड़ी है दातार..2

2,भव बिच तरणी जीवन म्हारो.. मँढ़ दैशाणो अम्बे एक सहारो..
झगड़ु री तरणी पल में तारी… अम्बे...................
मोहे झगड़ु समझ कर पार.....मैया मेरी करणी बड़ी है दातार.2

3,ममता रूपी करनल मात मेहाई , जग विच महिमा थाँरी अद्भुत छाई
शेख री मैया पल में करदी सहाई……अम्बे....................
मोहे शेख समझ कर पार....मैया मेरी करणी बड़ी है दातार 2

4,लाखीणो है देश मां थाँरो.. औरण विच मन रमीयो म्हारो.
कर जौड़्यां रतनु हणमत ध्यावे…..अम्बे...................
मोह ग्वाल समझ कर पार…….मैया मेरी करणी बड़ी है दातार 2
मोहे काबोसमझ निहार.....मैया मेरी करणी बड़ी है दातार 2

======================✒ *हनुमान सिंह रत्नु*

तर्ज : उमराव थारी बोली प्यारी लागै

1. रसना गावै गीतडा, नैणा कोड करंत
आसी म्हारै आवडा, (ज्यूं ) सुखै मांय बसंत
ओ मेहाई म्हारै आंगण आज पधारो म्हारा राज
ओ किनियाणी थांकी ओल्यूं म्हानै आवै म्हारी माय

2. आसी म्हारै आंगणै, मात निभावण कौल
रत्न जडाद्यूं चोंच के, कागा मीठो बोल
ओ मेहाई थांकी ओल्यूं म्हानैं आवै म्हारी माय
ओ किनियाणी म्हारै आंगण आज पधारो म्हारा राज

3. भाण उगंता मात रा , चांद सरीखा दीद
म्हारै तो मन ज्यावसी, चांदलियै सूं ईद
ओ किनियाणी म्हारै आंगण आज पधारो म्हारी माय
ओ मेहाई थांकी ओल्यूं म्हानै आवै म्हारा राज

4. भोर हुवै जद भगवती, जपूं तिहारो नाम
सगती थारै सेवगां, बिगड्या सारो काम
(सगती प्रांजल पात का, बिगड्या सारो काम ।)
ओ मेहाई म्हारै आंगण आज पधारो म्हारा राज...

प्रहलाद सिंह कविया प्रांजल
तर्ज :- जल भरियो हिबोला खाय तानिया रेशम की

हद भगतां रै मन भाय
लोवड करनल की
हद भगतां रै मन भाय
(रंगरेजा ल्याय रंगाय)
लोवड करनल की
करनल की जी लोवड करनल की जी
करनल की जी लोवड करनल की जी *2
रंगरेजा ल्याय रंगाय
लोवड करनल की
हद भगतां रै मन भाय
लोवड करनल की
मां ममताली याद करां
जद दौड़ी दौड़ी आय
किनियाणी रै नाम सूं
कोई सब दुखडा मिट ज्याय
मेहाई री लोवड आछी म्हानैं लागै
किनियाणी री लोवड आछी म्हानैं लागै
आछी म्हानैं लागै बीरा प्यारी प्यारी लागै
आछी म्हानैं लागै बीरा प्यारी प्यागै लागै
जद ओढ बिराजै सुरराय करनल किनियाणी

डाढ्याली री मूरत प्यारी म्हानैं लागै
प्यारी म्हानैं लागै बीरा चोखी चोखी लागै
मैया (जद) मधुर मधुर मुसकाय डोकर डाढ्याली
हद भगतां रै मन भाय
लोवड करनल की
देव प्रांजल रै मन भाय
लोवड करनल की

प्रहलाद सिंह कविया

तर्ज, मत कलयुग लखी घबराओ...
====================
*चिरजा*

टेर, मत वचना कोल भुलावो...2
म्हारी राजल अम्बे, पृथ्वी री लाज रखावो....
चारण घर जाई ,पृथ्वी री लाज रखावो.....

1,नवरोजा डोलो मांग्यो है दुस्मण,
आफत फंद छुडा़वो । 2
म्हारी मरोड़ है आप भरोसे,2
आप ही सहाय करावो..।।
म्हारी राजल अम्बे,पृथ्वी री लाज रखावो....
चारण घर जाई, पृथ्वी री लाज रखावो.....

2,शीश रो ताज ,लाज है म्हारी,
मतना आज झुकावो ।2
म्हांरी गई तो थाँरी जासी, 2
मतना दोष लगावो ।।
म्हारी राजल अम्बे, पृथ्वी री लाज रखावो....
चारण घर जाई, पृथ्वी री लाज बचावो....

3, गड बिकाणों आप शरण में,
मत ना देर लगावो ।2
आप भरोसे गड रा कँगुरा ,2,
झटपट सिघं सजाओ..।।
म्हारी राजल अम्बे , पृथ्वी री लाज रखावो...
घर चारण जाई, पृथ्वी री लाज रखावो....

4,करनल आया ज्यूँ थे आओ,
काना बोर ना छाओ ।2
थाँरो आसरो है मां राजल 2
सुत री आण रखाओ ।।
म्हारी राजल अम्बे पृथ्वी री लाज रखावो....
घर चारण जाई, पृथ्वी री लाज रखावो....

5,पृथ्वी पुकार सुणी मां राजल,
झटपट सिंघ सजायो ।2
डोला मे बैठी राजल अम्बें ,2
नैणा में क्रोध समायो ।।
म्हारी राजल अंबे पृथ्वी रो मान रखायो..
घर चारण जाई पृथ्वी रो मान रखायो...

6,दिल्ली पति जद देख्यो डोलो,
मन में मौज भरायो ।2
झटपट छोड़ सिंघासन दुस्टी,2
डोला रे नेड़ो आयो ।।
म्हारी राजल अम्बे पृथ्वी रो मान रखायो...
घर चारण जाई पृथ्वी रो मान रखायो....

7,पृथ्वी नैणा भर आँसुड़ा,
मन ही मन में ध्यायो 2
अकबर हाथ कनात उठाई 2
अम्बें बब्बर रूप दिखायो ।।
म्हारी राजल अम्बे पृथ्वी रो मान रखायो......
घर चारण जाई पृथ्वी रो मान रखायो.......

8 ,पक़ड़ दुष्ट अकबर ने राजल ,
हाथळ जोर लगायो । 2
नवखडं ऊपर लेर सिधाई, 2
शक्ति रूप दिखायो ।।
म्हारी राजल अम्बें पृथ्वी रो मान रखायो....
घर चारण जाई, पृथ्वी रो मान रखायो.....

9, गऊ गऊ करके प्राण बचाया,
कर जोड़्या मात मनायो । 2
नवरोजा में अब नही राखुं 2
अकबर सोंगध खायो ।।
म्हारी राजल अम्बे पृथ्वी रो मान रखायो.....
घर चारण जाई पृथ्वी रो मान रखायो....

10, राजल किरत सागर भरभर,
गागर नाहीं समायो ।2
पृथ्वीराज री भक्ति हणमत,2
लैख में आज लिखायो ।।
म्हारी राजल अम्बे पृथ्वी रो मान रखायो.....
घर चारण जाई पृथ्वी रो मान रखायो...... 3
----------------------------------------
--✒ *रचना हनुमानसिंह रत्नु*
विशाल सिंह सा कविया
आदि शक्ति हिंगलाज अवतार मां अावंड़ महीमा पर ओजस्वी रचना चिरजा रूप में ।

तर्ज,,हल्दीघाटी में समर लड्यो... _________________________
*चिरजा*
टेर,हिंगोळ गिरी दरबार सज्यो,2
मांमडियो मां हिंगलाज भज्यो ।
महाशक्ति आदेश भयो जद,2
आवड़ रो अवतार हुयो .......।।
महाशक्ति आदेश भयो जद,
आवड़ रो अवतार हुयो........2

1,विक्रम संवत आठ सैंकड़ा,2
साल आठवों आयो हो....।
चेत्र सुदी नवमीं दिन उजळो,2
मंगल शुभ दिन छायो हो..।।
हिंगलाज रूप धर मामड़ घर,2
शरणा में सारा देव खड़ा..।
माड़ धरा हरसायी सारी,
दानव काँप्या बड़ा बड़ा......।।
चारण कुळ माही देव सगत 2
घर मामड़ मंगलाचार हुयो....
महाशक्ति आदेश भयो जद,
आवड़ रो अवतार हुयो....2

2,नानणगढ़ रो अदन शुमरो ,2
मन माही कुबद बिचारी ही ।
आवड़ संग माही निकाह करूं,2
मामड़ घर खबर पुगादि ही..।।
अनुचित ब्याह न होय शुमरा,2
महाशक्ति समझायी बड़ी...।
पकड़न आवड़राय मात ने,
यवन फौज पाछे पड़ी
सात चळु में हाकड़ों शोख्यो,2
हूण राज रो नाश कर् यो.....
महाशक्ति आदेश भयो जद,
अावड़ रो अवतार हुयो.......2

3,बीरा रा प्राण बचावण ने, 2
मां आवड़ लोवड़ी भान ढक्यो ।
देव सभी घबराय गया नभ,2
धरती पर हाहाकार हुयो..।।
पवन वेग से पियूष आयो,2
मेहरख ने जद जाग हुई ।
तात रो वंश बचावण ने,
मां आवड़ ही पतवार हुई ।।
मूर्छित भ्रात ने मूर्छा तजी..2
लोवड़ औटां से भान ऊग्यो..
महाशक्ति आदेश भयो जद,
आवड़ रो अवतार हुयो....2

4,मार तेमड़े दानव ने ,2
मां तेमड़राय कहाया हा..।
पश्चिम मरुधर धोराँ माही,2
आवड देवल़ पुजवाया हा ।।
मां आवड़ अवतार धरा पे,2
चारण कुळ रो मान बण्यो, ।
दुष्टदलन खलकामी खपीया,
मां सामिं जो आय तण्यो ।।
रतनु सूरज मामाड़ रतन री,,2
हणमत महिमा ओज कह्यो ...
महाशक्ति आदेश भयो जद
आवड़ रो अवतार हुयो....
हिंगोल गिरी दरबार सज्यो,
मामड़ियो मां ने जाय भज्यो
महाशक्ति आदेश हुयो जद,
अावड़ रो अवतार हुयो....3
-------------------------------------------रचना ✒हनुमान सिंह रत्नु

प्यारा घणा लागो अम्बे खुडद नरेश
भाला घणा लागो अम्बे मांत ईन्दरेश

1 - काग उडाऊ मां में शगुन मनावा सा-2
अभी जोऊ मां बाट हमेंश
प्यारा घणा - - - - - - - - - - - - - - - - -

2 - धिन मायड जिण कुंख जनमिया सा-2
धिन बाबुल वालो देश
प्यारा घणा - - - - - - - - - - - - - - - - - -

3 - दर्शण बिन म्हारी अखियां तरसे सा -2
कद आवे लो संदेश
प्यारा घणा - - - - - - - - - - - - - - - - - -

4 - जद ध्याया जद आतुर आया सा-2
काट्या म्हारा कष्ट क्लेश
प्यारा घणा - - - - - - - - - - - - - - - - - -

5 - सुत शिवराज ने चरणा में रखो सा-2
पारस करें अरजी आ पेश
प्यारा घणा - - - - - - -- - -- - - - - - - -

तर्ज ..उमराव थाँरी बोली प्यारी लागे, महारा राज
====================
*चिरजा*

ओ..किनीयाणी थांरी कीरत जग
में सवाई म्हारी माय 2
किनीयाण जी ,ओजी म्हारी
माय .....2

1,आप भरोसे मावड़ी,
पुंगळ पती नरेश ।2
जैल छुड़ाई चारणी,
सँभळी रूप धरेश ।।2
ओजी किनीयाणी थाँरी जग में
जोत सवाई म्हांरी माय..
किनीयाण जी.ओजी म्हारी माय..

2, बिको सरणे आपरे,
आयो मंढ़ देशाण ।
राज दिरायो मावड़ी,
बगसी थे बिकाण ।।
ओजी किनीयाणी थाँरी महीमा
जोर सवाई म्हारी माय..
किनीयाण जी ओजी म्हारी माय..

3,कान खपायो करनलां,
मरुधर रिड़मल देय ।
गौधन कारण मावड़ी,
औरण भूमी लेय ।।
ओजी किनीयाणी थाँरी औरण
रज हे सवाई म्हारी माय....
किनीयाण जी ओजी म्हारी माय..

4,मात आसरो आपरो,
जोधे न मिल ज्याय ।
आप रखाई बातडी़
गढ़ं री निंव लगाय ।।
ओजी किनीयाणी थाँरी मुरत
मनमें बसाई म्हारी माय...
किनीयाण जी ओजी म्हारी माय..

5, पत राखी मां गंग री,
सामो फिरगीं लाल ।
रण भुमी रे मायनें,
करनल बणीया ढ़ाल ।।
ओजी करनादे थाँरी शक्ती
जोर सवाई म्हारी माय..
किनीयाण जी ओजी म्हारी माय..

6, राज रखाया मावड़ी,
भवसागर भर कूप ।
आया शरणे अम्बं के,
रजपुती कुल भूप ।।
ओजी किनीयाणी अम्बें राखी
राज सवाई म्हारी माय...
किनीयाण जी ओजी म्हारी माय..

7, धिन परवाड़ा करनलां,
सारे सबका काम ।
हणमत शरणे आपरे,
पावे चारों धाम ।।
ओजी किनीयाणी थाँरी लोवड़ी
छाँव सवाई म्हारी माय...
किनीयाण जी ओजी म्हारी माय 2

_________________________
🚩✒ *हनुमान सिहं रत्नु**

....... 🙏सातों बहना पावणी🙏....

चिरजा

तारां बिचलै चांद सरीखी, सूरत लुभावणी।
जग तारण हित जन्म लियो, अ सातूं बहना चारणी।
कुम कुम पग धरिया धरती पर, सातुं बहना पावणी।

आवड़ आछी छाछी लांगी, हुली गुली रेपल मां,
हिंगलाजा अवतारी अम्बा, मामड़ रै घर आवणी।
जग तारण हित......

तेमड़ राक्षस मार भवानी, तेमड़ राय कहाई जी।
देगराय दीनां दुखियां री, पल करै सहाई जी।
जग तारण हित.....

जैसाणै तन्नोट धरा पर, बसै आवड़ा माई जी।
बैरी बम नै भाटा करिया, फौजां नैं जितवायी जी।
जग तारण हित....

डूंगर माथै बण्यो देवरो, काला डूंगर राई जी।
जग पूजै मन मोद भर्यां, हे घंटियाली महमाई जी।
जग तारण हित....

दुष्ट वसन दूषित कर दिन्या, नाग रूप धर ध्यायी जी।
मारवाड़ में सांची सगती, नागणेच्यां कहलाई जी।
जग तारण हित...

भादरियै में भवन सुहाणूं, शोभा पार ना पाई जी।
भादरियै की राय, पुत्र प्रांजल की करो सहाई जी।
जग तारण हित

प्रह्लाद सिंह कविया प्रांजल
भवानीपुरा
7425996344

तर्ज :मीठे रस सूं भरयोडी राधा राणी लागै

ओ मीठे रस से भरयोडी थारी वाणी लागै
ओ मैया राणी लागै
ओ म्हानै प्यारी प्यारी देशाणां धीराणी लागै
आ दूनिया तो झूठी झूठी , मैया म्हारी सांची
भगतां री हरदम रखवाली, तारै बनकर मांझी
ओ मढ धाम सुरलोग रजधानी लागै
ओ म्हानै प्यारी प्यारी देशाणां धीराणी लागै

ना तुमसो कोई देव डोकरी, ना थांसी सकलाई
चारण वंश अवतरी अम्बा, करणी नाम कहाई
ओ देवल मात की लली तो जगजाणी लागै
ओ म्हानै प्यारी प्यारी देशाणां धीराणी लागै
ना चाहूं मां सोनो चांदी, थारै चरणां पात रहै
जब तक चंदा सूरज तारा, मां बेटा की बात रहै
ओ करणी मात जस में ही आणीजाणी लागै
ओ म्हानै प्यारी प्यारी देशाणां धीराणी लागै

प्रहलाद सिंह कविया प्रांजल
खुडद में चाल ए मनवा, जहां नवलाख रमती है .।
है द्वारै पे खडा भैरूं रास की रात रचती है।
खुडद में चाल ओ मनवा.....

है हिंगलाजा वहां आवड भी सातों भाण के संग में.।
और करनल मात मोटोडी रमी है रास रै रंग में. ।
है कण कण कीरती अम्बे नेह रसधार छनती है।
खुडद में चाल ए मनवा जहां नवलाख रमती है

इन्द्र अगवाण हो कर के रास त्यौंहार है करती
रास के साथ सगती पाप का संहार भी करती
है दुष्टों का डरे मनवा भयंकर वार करती है।
खुडद में चाल ए मनवा जहां नवलाख रमती है

ये अंम्बर भी झुके पग में ध्वजा जब लाल फहराती
मां सुत की साद सुणता ही आग के वेग है आती
है जिसपे तूढती मैया कृपा कबहूं ना थमती है
खुडद में चाल ए मनवा जहां नवलाख रमती है

जो आना भी नहीं चाहे मां उनको भी बुला लेना
बुलाकर भोले बालों के भाग अम्बे जगा देना
है प्रांजल लाडला और लाडलों से मां की बनती है
खुडद में चाल ए मनवा जहां नवलाख रमती है

प्रहलाद सिंह कविया प्रांजल

🙏🙏🙏🚩🙏🙏🙏
🌹चिरजा प्रभाती 🌹
कर किरपा जागो माँ करणी , जय हो जोगण जरणी ए ।
कर किरपा जागो माँ करणी ए ।।

रजनी त्याग आयो संग रश्मि माँ , धाकड़ दिनकर धरणी ए ।
आलस छोड़ उठो माँ अम्बे , करो मेहर सुख करणी ए ।।
कर किरपा जागो माँ करणी ए ।।

जति कैलाश जाग्या जोगेशर जी , घट हरसी शिव घरणी ए ।
जाग्या शेष शय्या जगदीशर , वेद ब्रह्मा मुख वरणी ए ।।
कर किरपा जागो माँ करणी ए ।।

तखत तेमडे़ जागी माँ तेमड़ जी , चाळक दानव चरणी ए ।
चोंचलवे सूरमदे चण्डी , दरस कियों दुख दरणी ए ।।
कर किरपा जागो माँ करणी ए ।।
जग तारण माँ सैणल जागी जी , धिन जुढिये मढ धरणी ए
सोनथली सुख सात समागम , शरण सदा सुख शरणी ए
कर किरपा जागो माँ करणी ए ।।

नृप नमे जोगी नर नारी माँ , भगतो रा मन भरणी ए ।
सुपरभात बसो घट सगती , तारण भव जल तरणी ए ।।
कर किरपा जागो माँ करणी ए ।।

दृग तरसे देवो झट दरसण माँ , कर किरपा माँ करणी ए ।
सिन्ढायच सूरो निज शरणे , ध्यान सदा चित धरणी ए ।।
कर किरपा जागो माँ करणी ए ।।

सुरेश दान पुगलिया
9950767913

प्रभाती
जाग करणी जगत जननी तरण तरणी तारणी ..…..टेर

आद्य देवी आप अम्बा धिन्न खड़ग धारणी ,
रखवाळण महर राखण सैन असुरों संहारणी ,
जाग करणी जगत जननी ------------------।।1।।

खळां दळां मात खंडन मधु कैटभ मारणी ,
विघन हरणी वीस हाथां करणी सुख कारणी ,
जाग करणी जगत जननी--------------।।2।।

आप पूरण करण आशा आय भीरे उबारणी ,
दियण रोजी नित्य देवी सरव कारज सारणी ,
जाग करणी जगत जननी -----------------------।।3।।

अरज मीठो मीर आखे चित्त धरियो चारणी ,
लोवड़ियाळी लाज राखो हिंगळा अघ हारणी ,
जाग करणी जगत जननी ----------------------।।4।।
मीठा मीर डभाल

चिरजा प्रभाती मधुकर माड़वा ।

कय अठ जाम नाम लय करणी ,
हाम माँ पुरण हमारी रे ।टैर ...

जांगल राज धरण जग जरणी ,
वरणी विगत वतारी रे ।
रिड़मल काज सफल किय शरणी करणी कांनड़ कपारी रे ।कय .....

मरूधर ताज राठोड़ मही भल ,
जोधल नीव जचारी रे ।
करणी बीक शरण लिय कांधल ,
बीकल नगर बसारी रे ।कय ....

जेसलमेर बीकांण जमी पर ,
धाम धनेरु पर धारी रे ।
जेतल पीड़ा हर जग जाहर ,
सीम विवाद सुधारी रे ।कय ...

क्रोड़ गुना हथ जोड़ करनला ,
धोड़ जिका जन धारी रे ।
माँ चरणां मन मोड़ मधुकर ,
अवस आ ओड़ उवारी रे ।कय ..

अम्ब लिय नाम उबार उपासी ,
गासी जस गुण कारी रे ।
बिठू भमर राख विसवासी ,
आसी माँ उपकारी रे ।
कय अठ जाम नाम लय करणी ,
हाम माँ पुरण हमारी रे ।🙏🏻🙏🏻🚩

🚩🖊 चिरजा- भैरव नाथ री
कृत- परमीला देपावत
----------------------------------------
सिवंरे जकां रे आवे ,भैरूं रात्यूंई डमरू बजावे••२
थारे सीस पे लटिया साजे••२

चावण्ड माँ रो चेलो बाजे, भैरू नाचे घूघर बाजे ।
दोनो रे भाई सागे,भैरूं नाचे धूधर बाजे ।।
सिवंरे जकां रे आवे,भैरूं रात्यूंई डमरू बजावे ।
थारे काना मे कुण्डल साजे ••२

काशी धर मे विराजे,भैरू नाचे घूघर बाजे ।
दोनों रे भाई सागे,भैरू नाचे घूघर बाजे ।।
सिवंरे जकां रे आवे, भैरूं रात्यूंई डमरू बजावे ।
थारे मुण्डन माला साजे••२

शिव रो अवतारी बाजे, भैरू नाचे घूघर बाजे ।
दोनो रे भाई सागे, भैरू नाचे घूघर बाजे ।।
सिवंरे जकां रे आवे, भैरूं रात्यूंई डमरू बजावे ।
थारे कङिया मे घूघर साजे••२

निज देवरिये मे नाचे, भैरू नाचे घूघर बाजे।
दोनो रे भाई सागे,भैरू नाचे घूघर बाजे ।।
सिवंरे जकां रे आवे, भैरूं रात्यूंई डमरू बजावे ।
रविवार छठ और तेरस••२

सेवक रे रोम विराजे, भैरू नाचे घूघर बाजे ।
दोनो रे भाई सागे, भैरू नाचे घूघर बाजे ।।
सिवंरे जकां रे आवे, भैरूं रात्यूंई डमरू बजावे ।
बीरा हात्त जोङ मै गाऊं••२

घरवाले री नौकरी चाऊं, भैरू नाचे घूघर बाजे ।
दोनो रे भाई सागे, भैरू नाचे घूघर बाजे ।।
सिवंरे जकां रे आवे ,भैरूं रात्यूंई डमरू बजावे ।
भैरव तो गावे बाला••२

सब कष्ट हरेला गोरा, भैरू नाचे घूघर बाजे ।
दोनो रे भाई सागे, भैरू नाचे घूघर बाजे ।।
सिवंरे जकां रे आवे, भैरूं रात्यूं डमरू बजावे ।
म्हारा मामा है मतवाला••२

भक्तां रा राज रूखाळा, भैरू नाचे घूघर बाजे।
दोनो रे भाई सागे ,भैरू नाचे घूघर बाजे ।।
सिवंरे जकां रे आवे, भैरूं रात्यूंई डमरू बजावे ।
परमीला जब जब गावे••२

भैरू रूणझुण करता आवे, भैरू नाचे घूघर बाजे ।
दोनों रे भाई सागे, भैरू नाचे घूघर बाजे ।।
सिवंरे जकां रे आवे, भैरूं रात्यूंई डमरू बजावे ••
-----------------------------
रचना- परमीला देपावत
टाईप- सांवल दान 🙏🏽🚩🚩

*"भैरूनाथ "*
========
(सोरठा)
*भय हरजै भोपाळ,*
*दुखडा़ सब करजै दुराँ!*
*राखण नै रिछपाल,*
*भल भल आजै भैरवां !! **
--------------------------------------
*(राग- माड) **

ओ म्हारी सुण अर्जी मर्जी मतवाला, आया गरज सरे..
आया गरज सरे मतवाला,
क्यूं अति देर करे...ओ म्हारी..(टेक)

असहणों दर्द ऊठ्यो ऊर मांही,अनुजा करूण करे..
नैणां निरर्झर बादळ बरसे, राधा रूदन करे.. म्हारी सुण अर्जी मर्जी मतवाळा...
..(1)

तात मात भ्राता सुत बन्धु ,अणहद सोच करे ..
हिवडो़ हूयो अधीर घणेरो,दैह न धीर धरे.. (2)
म्हारी सुण अर्जी,मर्जी मतवाळा...

बेगो आ भायां रा बांदव,तूँ ही दुखडा़ हरे...
ओखद देवण आजै अगाडी़,मतना जेज करे..
म्हारी सुण अर्जी मर्जी मतवाळा...
(3)

सगत्यां संग आजै अगवाणी,मत ना रीस(गुस्सा) करे..
भक्तां सूं बिसरो मति रे, तुम बिन नांय सरे..
म्हारी सुण अर्जी मर्जी मतवाळा...(4)

कारज सारण सेवग ऊबारण,क्यूं अति बेर करे...
बारठ रिछपाल चरण रो चाकर,श्रवणा टेर करे... (5)
म्हारी सुण अर्जी ,मर्जी मतवाळा,
आया गरज सरे.. आया गरज सरे... भैरवां क्यूं अति देर करे..
म्हारी.... 🙏
‌!! जय मां भवानी । जय भैरवनाथ !!
🙏🙏चिरजा🌷🌷

दोहा :-
माँ शक्ति को अगवाण मोटो, हेटण विपद हमेश
बेगा आवो भाई भैरव, काटण संकट क्लैश

म्हारे हैले बैगों आवणो
भाई भैरव करुं बुलाण...
शिश उपर मुकुट सोहे कुण्डल सोहे कान
भाल उपर बिंदिका सोहे भलो उगो ज्यो भाण

छः शास्त्र चारों वेद गावे अठारह पुराण
ॠषी मुनि सुर नर करें नित थारो बखान

माँ चण्डी का कुंवर लाडेसर रहो थे अगवाण
शंकर का अंश औतारी बड़ों साणो सुधियाण

डम डम बाजे डैरवा घम घम घुंघर घमकाण
एक हाथ में भालो दर्शे दूजे में कृपाण

तेल सिन्दूर अंग रमाओ जटा जुठ बिठयाण
मद पिय चकाचक रहो चढ़ो स्वान विमाण

खं खं खैतरपाल बिरा नारसिंग बलवान
रणखेता जय कर गाजो बिच अखाड़े आण

बीरा रहीजो हरदम साथे राखो म्हारी शान
ज्ञान गुण सदा बक्शो देवो धिणो धनधान

मां शक्ति को बात हमारी कर दिजो बतियाण
बड़ा बड़ा म्हारा काम होया आपरे समर्थ ताण

बीर बीर कह जद टेरु आज्यो प्रबल परवाण
भुपसा ख्याली गावे थाने जोड़ दोउ पाण
लेखक :-
🤗 मां करणी का लाडला❤️
✍️भुपसा ख्याली 🙏

*रिछपाल सिंह "रजवाडी़" कृत

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

current affairs 2024 to 2025

KARNI MATA CHIRJA

economic